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Antivirus Use Kaise Kare Aur Kaun Sa Antivirus Sahi Hain, Computer Aur Laptop Ke Liye



कितना देता है आपका एंटी वायरस??

इंटरनेट है, तो हैकर्स भी है। एंटी वायरस है, तो उसको मात देने वाले भी है। ऐसे में अपने डेस्‍कटॉप, लैपटॉप या टैब के लिए कौन-या एंटी वायरस चुना है आपने?? और कितना देता है आपका एंटी वायरस??

देखें, एंटी वायरस आपके सिस्‍टम को धीमा न करेंएंटी वायरस द्वारा बेस को अपडेट करना है जरूरी
आपका एंटी वायरस थ्रेट्स के लिए तैयार है या नहीं??
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फायर वॉल को भी समझें

कुछ एंटी वायरस आपके इंटरनेट ट्रैफिक (आप इंटरनेट पर किन साइट्स पर जाते है) पर भी नजर रखते है। ये आने वाले वायरस या मालवेयर को रोककर आपके सिस्‍टम को सुरक्षित रखने में मदद करते है। कई बार बहुत समय से एंटी वायरस इंटरनेट कनेक्‍ट न करने या कोई भी थ्रेट न होने पर डिसेबल्‍ड भी हो जाते है। कुछ समय तक काम न करनेे की स्थिति में जरूरी हो जाता है कि आप समय-समय पर चेक करते रहें कि आपका एंटी वायसर ािम कर रहा है या नही।
फास्‍ट-फॉरवर्ड युग में हम अपनी हर छोटी-बडी जरूरतों के लिए तकनीक का सहारा लेते है। ऐसे में कंप्‍यूटर और फोन हमारी जिंदगी का अभिन्‍न हिस्‍सा बन गए है। आज हम अपनी निजी जानकारियों के साथ-साथ बैंकिग सुविधाओं को भी फोन, लैपटॉप या अन्‍य उपकरणों से ही मैनेज करते है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम अपने उपकरणों की सुरक्षा का भी ख्‍याल रखें। इंटरनेट इस्‍तेमाल करते वक्‍त हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जिससे हम अपने उपकरणो को वायरस से बचा सकें।एक अनुमान के मुताबिक, लगभग हर साल लाखों सिस्‍टम मालवेयर ( वायरस जिन्‍हे इस से तैयार किया जाता है कि ये आपके सिस्‍टम नुकसान पहुचा सकें या फिर आपके फोन या सिस्‍टम का नियंत्रण हासिल कर सकें) के चंगुल में आ जाते है। इससे हमारी निजी जानकारियों के सार्वजनिक होने के खतरे से लेकर बैंक खातों में सेंध लगने का खतरा बना रहता है। आज हम अपने फोन में मोबादल बैंकिग ऐप्‍स का इस्‍तेमाल करते िही है। हमारे ईमेल भी आंतरिक तौर पर काफी ऐप्‍स से जुडे रहते है। यहां से भी हमारी निजी जानकारियां चोरी की जा सकती है। ऐसी स्थिति में यदि आप अपने उपकरणों को सुरक्षित नहीं रखते है, तो आपकी जानकारी के बिना ही आपके सिस्‍टम या फोन में मालवेयर दाखिल हो जाते है। चुनौती यह भी बनी हुई है कि स्‍मार्टफोन्‍स को वायरस से कैसे बचाएं, क्‍योकि मोबाइल के लिए कोई दमदार एंटी वायरस काम नही कर पाते है। यही वजह है कि हैकर्स मोबाइल फोन को ही निशाना बनाते है। यहां ये जानना जरूरी हो जाता है कि कौन से एंटी वायरस दमदार है, जो आपके गैजेट्स को पूरी तरह से सुरक्षित रख सकें। जब एंटी वायरस लें, तो ध्‍यान दे कि उसका काम स्‍कैनिंग से शुरू होता हो। स्‍कैनिंग एंटी वायरस का महत्‍वपूर्ण काम है। मूलत:  एंटी वायरस ही प्रोग्राम यास फाइल को खुलने से पहले उसे स्‍कैन करता है और चेक करता है िहै कि कही कोई मालवेयर तो नही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोई भी फाइल या प्रोग्राम आपके सिस्‍टम या मोबाइल पर खुलता है। हर एंटी वायरस में पहले ही पहचाने जा चुके मालवेयरस का डाटा भी मौजूद रहता है। अच्‍छे एंटी वायरस मालवेयर्स के डाटा बेस को बहुत जल्‍दी-जल्‍दी अपडेट करते है। इसीलिए सलाह दी जाती है कि सबसे अपडेटेड एंटी वायरस का इस्‍तेमाल दिन गैजेट्स में करने अधिकतर एंटी वायरस में ऑनलाइन अपडेट करने की सुविधा देते है। अगर आप ऐसे किसी एंटी वायरस का इस्‍तेमाल कर रहे है, तो समय-सयम पर इंटरनेट द्वारा उसे अपडेट करते रहे। सुरक्षित काम करने के लिए एंटी वायरस को अपडेट करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है मालवेयर्स को सिस्‍टम से दूर रखना। मालवेयर्स से बचने के लिए बाजार में मौजूद कई फ्री एंटी वायरस को डाउनलोड कर इंस्‍टॉल कर लेते है। ध्‍यान रहे कि ये फ्री एंटी वायरस सिर्फ वायरस को ढूढते है और सिस्‍टम में आने से रोकते है, पर उन्‍हे सिस्‍टम से हटाते नही पाते है। इसलिए एक बार अच्‍छी क्‍वालिटी का एंटी वायरस खरीदकर अपने गैजेट्स में इस्‍तेमाल करे। इसके अलावा जो ध्‍यान देने वाली बात है, वह हैफाइल श्रेडर । आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि डिलीट या क्लियर रिसाइकिल बिन करने से भी फाइलें आपके हार्ड ड्राइव से डिलीट नहीं होती है। ये थ्रेट फाइलें कहीं छिप जाती है।जब आप फाइल श्रेडर का इस्‍तेमाल अपने सिस्‍टम में करते है, तो ये थ्रेट फाइल को पूरी तरह से आपके सिस्‍टम से हटा देता है और सुरक्षा प्रदान करता है।आप एंटी वायरस चुनें, उससे पहले रैनसम वेयर को समझना भी जरूरी है। दरअसल, रैनसम वेयर एक ऐसा अटैक है, जो कि आपके सिस्‍टम में मौजूद फाइलों को किसी अन्‍य फॉर्मेट में बदल देता है। इन फाइलों को वापस रिकवर करने( फाइलों को वापस पाने) के लिए आपको पैसे चुकाने पड सकते है। यह अभी हाल ही सामने आया थ्रेट है, जो अब सिरदर्द बन सकता है। सिर्फ एवीजी एंटी वायरस की टीम ने ही इसे पहचाना है और इससे निपटने की तैयारी की है। इसके अलावा बाजार बाजार में मौजूद कोई भी एंटी वायरस रैनसम वेयर से सुरक्षा नहीं देता है।
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एंटी वायरस चुनने के लिए तीन अच्‍छे विकल्‍प है। पहला है यूजर्स ओपिनियन यानी जो लोग इन एंटी वायरस को पहले से ही इस्‍तेमाल कर रहे, उनसे सलाह लें। सोशल मीडिया और अन्‍य वेबसाइट्स से उनके रिव्‍यू पढ कर भी आप तय कर सकते है कि आपके लिए कौन सा एंटी वायरस फायदेमंद रहेगा। ध्‍यान दें, कई बार ये रिव्‍यू फर्जी भी होते है, जो कि कंपनी ने अपनी बिक्री बढाने के लिए लिखवाएं हों। दूसरा तरीका है कि आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की राय को पढने के बाद अपना एंटी वायरस चुनें। यह तरीका सबसे भी साबित हो सकता है, क्‍योकि तकनीकि जटिलताओं के चलते विशेषज्ञ के सुझाव पर भरोसा करना एक सुरक्षित विकल्‍प है। तीसरा है कि आप खुद ही ट्रायल वर्जन का इस्‍तेमाल करके निर्णय लें। इस समय बाजार में मौजूद एंटी वायरस की बात की जाए, तो अवास्‍ट , ऐवीजी और मेंकेफी तीनों ही अच्‍छे एंटी वायरस है। हां, इतना जरूर ध्‍यान दे कि एंटी वायरस विश्‍वसनीय कंपनी का ही होना चाहिए और उसे टाइम-टू-टाइम अपडेट करते रहे।  
Antivirus Use Kaise Kare Aur Kaun Sa Antivirus Sahi Hain, Computer Aur Laptop Ke Liye Antivirus Use Kaise Kare Aur Kaun Sa Antivirus Sahi Hain, Computer Aur Laptop Ke Liye Reviewed by Shubham Chauhan on जून 20, 2017 Rating: 5

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