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About SUV Car



अब आप करें एसयूवी की सवारी
कार की सवारी आप कर चुके है, उसके बाद अब एसयूवी में फर्राटा भरने का मन करता है, तो जान लें कि कौन-सी उसयूवी आपके लिए बेहतर है?
कॉम्‍पैक्‍ट एसयूवी में यदि वैल्‍यू ऑफ मनी की बात की जाए, तो मारूति ब्रेजा मुनाफे का सौदा साबित होगी। वहीं बडी एसयूवी की बात की जाए, तो टोयाटो की फॉर्च्‍यूनर इस सेगमेट पर राज करती है। अभी हाल ही में इसुजु की डी मैक्‍स वी क्रॉस पिक अप ट्रक भारत में लॉन्‍च किया गया, जो कि काफी पसंद भी किया जा रहा है। इससे पहले भी टाटा जेनॉन और महिद्रा मैक्‍स इस सेगमेट में मौजूद है। इन्‍हें उतनी लोकप्रियता नहीं मिल पाई।
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1 एसयूवी में चुनें मेनुअल गियर बॉक्‍स का ऑप्‍शन
2 सेकेंड व्‍हीकल के तौर पर एसयूवी खरीदें
3 ऑफिस के मकसद से हैचबैक कारें है बेहतर
जीप हमेशा से ही अपने टफ और बोल्‍ड लुक के कारण भारतीयों की पसंदीदा गाडियों में रही है। जिनकी जगह अब एसयूवी ने ली है। लोग एक गाडी होने के बाद जब दूसरी गाडी खरीदने के बारे में सोचते है, तो पहली पसंद एसयूवी होती है। इसका एक बडा कारण भारत की खराब सडके भी हो सकती है। साथ ही भारत की भोगोलिक स्थिति इस तरह की है कि यहां पहाड, समुद्र तट और रेगिस्‍तान तीनों ही तरह का क्षेत्र है। इन जगहो पर बेफिक्रि से गाडी चलाने और सैर सपाटे का मजा लेने के लिए सबसे अच्‍छा विकल्‍प एसयूवी ही नजर आता है। हमारे देश के बडे परिवारों के कारण भी लोग एसयूवी को चुनते है। साथ ही भारत में ऑफ रोडिंग के शौकीन लोगों की सेख्‍या दिनोंदिन बढती जा रही है, जो हैचबैक, सिडान या अन्‍य किसी सेगमेंट की गाडी के साथ मुमकिन नहीं है।एक रिपोट्र के अनुसार, 2010 में कारों की कुल बिक्री में 14 प्रतिशन भागीदारी एसयूवी की थी, जो इस साल मार्च में बढकर 25 प्रतिशत तक पहुच गई है। 90 और 2000 के शुरूआती दशक में भारत में एसयूवी को दो कैटेगरी में बांटा जा सकता था। भारतीय एसयूवी और विदेशी एसयूवी। भारतीय एसयूवी में टाटा की सफारी और महिंद्रा की वोलेरो और स्‍कॉर्पियों के तौर पर देखा जाता है और विदेशी एसयूवी और टोयोटा की फॉर्च्‍यूनर और फोर्ड की एंडेवर को जाना था। विदेशी ऑटो निर्माता कंपनियों ने भी भारतीयों की सस्‍ती ण्‍सयूवी की चाहत को देखते हुए रेनों ने डस्‍टर और निसान ने टेरानों को उतारा। इस तरह भारत में जीप या ण्‍सयूवी की दीवानगी के चलते भारतीय और विदेशी ऑटोमेकर लगातार कम दामों में स्‍मार्ट दिखने वाली गाडियां बाजार में उतारती रही है। इसी का नतीजा है कि आप बाजार में कॉम्‍पेक्‍ट एसयूवी का बोल बाला है और इस सेंगमेंट में सबसे ज्‍यादा विकल्‍प मौजूद है। वही एमपीवी और रेगुलर एसयूवी भी काफी लोगों की पसंद बनी हुई है। अमूमन भारत में एसयूवी की 7 लाख से शुरूआत होती है। वहीं दुनिया भर में ऑफरोडिंग गाडियों के लिए मशहूर जीप ने भी पिछले साल भारत में दस्‍तक दे दी है। हाल ही में देखने को मिला है कि महिलाओं का भी एक वर्ग है जो एसयूवी को पसंद करता है, क्‍योकि एसयूवी की ऊंची सीट्रिग पोजीशन के कारण रोड का एक बेहतर अनुमान मिलता है। लेकिन बढा सवाल यह है कि कम बजट में एक अच्‍छी एसयूवी कैसे पाई जा सकती है??
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बजट का खास ख्‍याल रखें और अपने बजट के अनुसार ही एसयूवी चुनें। अपने बजट के अनुसार उस सेंगमेंट में मौजूद विकल्‍पों को भी एक बार खंगाल लें। ध्‍यान रखें कि आपको यह भी समझना जरूरी होगा कि आप को अपने सेकेंड व्‍हीकल के तौर पर ले रहे है, तो ठीक है, अन्‍यथा ऑफिस जाने के लिए छोटी एसयूवी या क्रॉस ओवर गाडी ही लें। यदि आप ऑफरोड्रिग के शौकिन है, तो आप रेगुलर एसयूवी को छोडकर महिंद्रा की थार, फोर्स की गोरखा या इसुझु की डी मेक्‍स क्रॉस को चुन सकते है। वहीं अगर आपको बडी, ज्‍यादा स्‍पेस और तकनीकों से लेस एसयूवी चाहिए तो आप एंडवेयर फॉर्च्‍यूनर जैसी बडी एसयूवी चुन सकते है। साथ ही ऐसी एसयूवी से आप मोडेस्‍ट ऑफरोडिंग और पहाडों, बीच और डेजर्ट सफारी का भी बेफिक्री से मजा ले सकते है। फ्यल इकोनॉमी पर भी ध्‍यान दें। अक्‍सर डीजल गाडियां पेट्रोल गाडियों से महंगी होती है, तो आप यदि आपका एसयूवी का इस्‍तेमाल कम है, तो आप पेट्रोल एसयूवी चुन कर भी 1 से 1.5 लाख तक बचा सकते है। एसयूवी में आपको 44 और 42 जैसे दो ऑप्‍शन में मिलते है। ऐसे में अगर आप एक्‍सट्रीम ऑफ रोडिंग के शैकिन नहीं है, तो 42 ही चुनें। इससे भी आप 2 से 3 लाख रूपये तक बचा पाएंगे। एसयूवी में ऑटोमेटिक  ट्रांसमिशन की जगह आप मेनुअल गियरबॉक्‍स चुन कर भी अपना पैसा बचा सकते है। इन सबके बाद भी यदि आपका बजट नई एसयूवी का नहीं है। आप एक पुरानी एसयूवी भी चुन सकते है, लेकिन पुरानी एसयूवी चुनने से पहले आपको  कुछ चीजें ध्‍यान में रखनी होगी। पुरानी गाडी खरीदते है, तो आपको उसकी मेटेनेस के लिए तैयार रहना होगा। अमूमन पुरानी बडी एसयूवी काफी सस्‍ते दाम पर मिल जाती है। इसके दो कारण होते है। एक कि इन्‍हें खरीदने वाले शौकीन होते है, जो जल्‍द ही इनसे बोर हो जाते है। शहरों में इन्‍हे चलाना आसान नहीं होता और इनका माईलेज भी हैचबैक या सिडान की तुलना में काफी कम होता है। दूसरा इनकी मेंटनेंस बहुत महंगी होती है, जिस कारण एक समय बाद लोग इन्‍हें बेचना ही सही विकल्‍प मानते है। ऐसे में आपके लिए जरूरी होता है कि आप इस लालच में न आए कि कम दाम में आपकों एडेवेयर, पजेरो या सीआवी जैसी बडी एसयूवी मिल रही है, तो ले ली जाए। पुरानी गाडी के फाइनेंस पर बैक नई गाडियों से 5-6 प्रतिशत ज्‍यादा ब्‍याज वसूलने है। इसलिए अच्‍छा होगा आप ब्‍याज की दर देखने के बाद ही फाइनेंस कराएं। पुरानी एसयूवी खरीदने से पहले उसकी हि‍स्‍ट्री भी चेक कर लें। अगर कार कंपनी के ऑथराइस्‍ड सर्विस सेंटर पर ही सर्विस और मेंटेन होती रही है, तो ऐसी गाडी आापके लिए फायदे का सौदा ही साबित होगी।    
About SUV Car About SUV Car Reviewed by Shubham Chauhan on जून 20, 2017 Rating: 5

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