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2017-06-15

Self Talk Ya Khud Se Kaise Baatein Karene Se Fayde (Benefits) In Hindi

Self Talk Ya Khud Se Kaise Baatein Kare In Hindi

अच्‍छी है खुद से खुद की बतकही

चलते-चलते कभी पेड-पौधों से बाते कर लेना। कभी खुद से ही मन की बात करना। घर में कोई नहीं, तो अपने डॉगी से बतियाना। अक्‍सर लोग इसे मानसिक बीमारी से जोडकर देखते है, लेकिन मन की सेहत के लिए ख्‍ह अच्‍छा है।जब कोई बच्‍चा अकेले में अपने खिलौनों, गुड्डे-गुडियों या पालतू जानवर से बात करता है, तो लोग इसे बचपना समझते है। ऐसी हरकत जब कोई व्‍यस्‍क करता है, तो लोग उसे बेवकूफ या पागल समझ बैठते है। कई शोध के अनुसार, अकेले में खुद से, पेड-पौधों या फिर पेट्स से बातें करना सेहतमंद रहने का एक आसान जरिया है। इससे आपके अंदर दबी तमाम परेशानियां, तकलीफें कम होती है। कई तरह की मानसिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है। ‘जर्नल ऑफ एक्‍सपेरिमेंटल साइकोलॉजी’ में प्रकाशित शोध के अनुसार, जो लोग अक्‍सर आत्‍मालाप (खुद से बातें करना) करते है, उनकी सोच, समझ और जवाब देने की क्षमता में सुधार होता है। इससे बच्‍चों के बर्ताव को निर्देशित करने में भी मदद मिलती है।
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अकेले, तो क्‍या गम है  घर पर अकेले है। बात करने के लिए कोई नहीं। मन की बात किससे कहें? खुद से बात करते हुए किसी ने देख लिया, तो क्‍या कहेगा ? कहने वाले, तो कहते ही रहेंगे। बिना शर्मिदा हुए आप जीभर कर करें खुद से बातें। यह कोई मानसिक बीमारी नही, एक सामान्‍य बात है। सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्‍ट कहती है कि खुद से बात करना (सेल्‍ट टॉक) अगर अप्रासंगिक या बेतुकि है, आपको मोटिवेशन नहीं दे रही है, तो इसका मनोरोग संबंधी मूल्‍यांकन किया जाना जरूरी है। इसके लिए सिजोफ्रेनिया की जांच करवानी चाहिए। अगर यह प्रासंगिक है, मोटिवेट करती है, हमारी आंतरिक आवाज है, तब यह हमारे लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। जब खुद से बातें करना किसी व्‍यक्ति को सकारात्‍मकता की तरफ ले जाए, तो आत्‍मविश्‍वास बढता है। यह हमें आशावादी सोच-विचार देती है1 आत्‍म-सम्‍मान ऊपर जाता है। जब हम ‘कर सकते है’ वाले अंदाल में खुद से बातें करते है, तो परफॉर्मेस बेहतर होती है। खुद से हार मानने या नकारात्‍मक व्‍यवहार में कमी आती है। वेल्‍स के बैगर यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजिस्‍ट पालोमा मैरी बेफ्फा का कहना है कि जो लोग मन ही मन में या फिर जोर से बातें करते है, वे सेहतमंद रहते है। मन में बातें करने से आपको खुद पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है, जबकि जोर बातें करने का अर्थ होता है दिमाक का सही तरीके से कार्य करना न कि किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्‍त होना। मन में खुद से बातें करना मस्तिष्क को फिट रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह हमारे विचारों को सुनियोजित करती है। याद्दाश्‍त को मजबूत करती है। भावनाओं को व्‍यवस्थित करती है। अपने दिमाक में आप गहरे वार्तालाप में व्‍स्‍त रहते है, जिसका जवाब कोई और नहीं, बल्कि स्‍वयं आपके विचार देते है। वहीं जोर से बात करने को’साइलेंट इनर टॉक’ का विस्‍तार माना गया है। ऐसा तब होता है, जब मस्तिष्‍क में मौजूद कोई खास मोटर कमांड अनजाने में ही सक्रिय हो जाए। खुद से बातें करना का यह मतलब नहीं होता कि आप बेवकूफ है। वास्‍तव में, यह आपके विचारों को स्‍पस्‍ट करने में मदद करता है। स्‍ट्रेस को कम कर के मूड को बेहतर बनाता है।

पेट को कहें मन की बात


घर में पालतू जानवर है, तो उसे खिलाते होंगे। बाहर टहलातें होंगे। दुलार करते होगे, लेकिन क्‍या कभी उससे बातें करते है?  कभी ऐसा करके दकखिए, आपको रिलैक्‍स और सुकून महसूस होगा। एक अध्‍ययन के अनुसार, अपने पालतू जानवरों से बात करना आपकी सामाजिक बुद्ध‍िमत्‍ता को दर्शाता है। शिकागों यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप अपने पेट से बातें करते है, तो एक अपनापन का अहसास होता है। आप अकेले होकर भी अकेले नहीं होते । आप उनके साथ कोई भी बात शेयर करें, क्‍योकि कुत्‍ते, बिल्‍ली, तोता आदि पेट्स अच्‍छे श्रोता भी होते है। अपने डॉगी के सामने स्‍पीच प्रैक्टिस करें या फिर किसी ऐसी सचचाई को कुबूल करें, जिसे आप किसी और के साथ शेयर करने में डरते हो। किसी अपने को खो देने पर आप अपना दर्द, तकलीफ उनके साथ बांटकर देखें। मानसिक रूप से शांति महसूस होगी। एक अन्‍य शोध में कहा कहा गया है कि अपनी भावनाओं पर काबू रखने के लिए पेट से बातें करना सबसे आसान और बेहतर तरीका है।
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पौधे भी सुनेंगे आपकी


कई शोध हुए है, जिसमें कहा गया है कि जब कोई इंसान पौधों से बातें करता है या उसके सामने बैठकर गता है, तो इससे न सिर्फ पौधे तेजी से बढते है, बल्कि आपकी सेहत पर भी सकारात्‍मक प्रभाव पडता है। आज प्रतिस्‍पर्धा बढ गई है। दूसरों पर जल्‍दी विश्‍वास नहीं होता है। लोग अपने दिल की बात किसी से कहने में घबराते है। ऐसे में कुछ लोग अपने पेड-पौधे या पेट्स से बातों को शेयर करते है। कुछ पेड को गले लगाते है। इसे साइकोलॉजी में ‘वेटिलेशन थेरेपी’ कहते है। इसके जरिए आप दिल बात आसानी से बाहर निकाल पाते है। भाषण देना हो, ड्रामा करना हो, तो पेड-पौधों से बातें करके आप खुद को कहीं भी बिना झिझक बोलने के काबिल बनाते है।

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