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2017-09-06

Body ke liye aram ki jarurat kyu Hoti Hain

कभी तो ‘कुछ न करें’

दिन भर खुद को काम में उलझाए रखने से अच्‍छा है कभी-कभार कुछ न करना। इससे आप रचनात्‍मक बनते है।

एक नजर और भी

46%  भारत में कमकाजी लोग किसी न किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्‍त है।
61%  लोग मोबाइल पर सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करते है।

ऑफिस हो या घर बस काम ही काम । काम से फुर्सत मिला नही कि कौन फोन, टीवी या फिर सोसल मीडिया पर लग गए। ऐ अध्‍ययन के अनुसार एक खास समय के बाद दिमाग भी आराम चाहता है। लगातार खुद को काम में व्‍यस्‍त रखने से तनाव बझने लगता है। कई तरह की बीमारियां घेरने लगती है। इनसे बचना चाहते है, तो थोडी देर ‘खाली रहकर’ देखें यानी कुछ भी न करें। ‘कुछ भी न करना’ एक कला है। कुछ लोग इसे समय की बर्बादी मानते है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसके मानसिक रूप से कई फायदे है। व्‍यस्‍तता के इस दौर में थोडी देर खाली रहना, आपके दिमाग को शांति और सुकून देने का एक सस्‍ता और असान जरिया है। इससे आप दोबारा भरपूर ऊर्जा के साथ काम करने के लिए खुद को रीचार्ज कर पाते है।

कई विदेशी कंपनियों ने वर्कप्‍लेस पर कर्मचारियों को मानसिक शांति देने के लिए ‘डिस्‍क्‍नेक्‍ट टाइम’ की शुरूआत की है।

कुछ न करना भी एक काम है

इटली के लोग ‘कुछ न करने’ को ताजगी से जोडकर देखते है। उनके अनुसार, थोडी देर खाली रहना अपने आप में एक एक्टिविटी है। एक शोध की मानें तो कुछ न करने से आपके अंदर समस्‍याओं को आसानी से हल करने की क्षमता विकसित होती है। आप रचनात्‍मक बनते है। किसी भी परेशानी का हल आसानी से ढूंढ पाते है। शोधकर्ताओ के अनुसार, ये सारी विशेषताएं आपके अंदर तभी आती है, जब आप अपने विचारों को बिना किसी पाबंदी के विचरण करने देते है। जब दिमाग को आत्‍म-चिंतन करने का समय मिलता है, तो जीवन की गुणवत्‍ता खुद ब खुद सुधर जाती है। एक अध्‍ययन के अनुसार, कुछ घंटे या कुछ दिनों तक खुद को खाली रखना, आपको स्‍मार्ट तरीके से काम करना रहना सिखाता है। विदेशो में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को मानसिक रूप से खालीपन और शांति महसूस कराने के लिए वर्कप्‍लेस पर ‘डिस्‍कनेक्‍ट टाइम’ की शुरूआत की है। इसके तहत ऑफिस आवर के बाद किसी भी कर्मचारी के ऊपर घर पर ऑफिशियल ईमेल या किसी भी तरह के काम करने का दबाव नहीं होगा।

फायदे भी है कई

थोडी देर के लिए अपने दिमाग और उंगलियों को हर काम से मुक्‍त कर दें। ट्रैफिक सिग्‍नल में फंसे है, तो कुछ सोचने की बजाय खाली बैठें। कॉफी के लिए दोस्‍तों का किसी रेस्‍तरां में इंतजार कर रहे है, तो फोन पर गेम न खेलें। बस, अपने दिमाग को आराम करने दें। व्‍यस्‍त समय में भी अपने दिमाग को कही दूर निकल जाने दें। उसे ब्‍लैंक छोड दे। ऐसा करने से आप बेहतर सोच पाएंगे। अच्‍छा कर पाएंगे। दिमाग में सकारात्‍मक विचार आएंगे।

प्रकृति के करीब जाएं

घंटो सोशल मीडिया पर रहने से मानसिक द्वंद्व बढ जाता है। उसे इतने लाइक्‍स मिले, पर मुझे नहीं। इससे ऊर्जा में कमी आती है। थोडी देर सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकल कर देखें। खाली रहने की कोशिश करें। खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूर कर लेना आसान नहीं। ऐसे में छोटें-छोटे अंतराल में इससे दूरी बढाएं। अपनी सभी डिवाइसेज को रात में सोने से एक घंटे पहले बंद कर दें। सुबह उठकर सिर्फ चाय या कॉफी की चुस्‍की लें। फोन व लैपटॉप पर उठते ही उंगलियां न दौडाने लगें1 टीवी देखना किसी के लिए तनाव से छुटकारा पाने का जरिया हो सकता है, पर अधिक देर तक टीवी देखना समय की बर्बादी है। इससे अच्‍छा है पार्क में टहल आएं। प्रकृति को निहारें। चिडियों की चहचहाहट सुनें। इससे मन और मस्तिष्‍क को रिलैक्‍स महसूस होगा।

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